श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 190: युगान्तकालिक कलियुगके समयके बर्तावका तथा कल्कि-अवतारका वर्णन  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  3.190.17-18 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: संकीर्यन्त: परस्परम्॥ १७॥
शूद्रतुल्या भविष्यन्ति तप:सत्यविवर्जिता:।
अन्त्या मध्या भविष्यन्ति मध्याश्चान्त्या न संशय:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य आपस में सन्तान उत्पन्न करके वर्णसंकर हो जाएँगे। वे सब शूद्रों के समान तप और सत्य से रहित हो जाएँगे। अछूत (चाण्डाल आदि) क्षत्रिय, वैश्य आदि के कर्म करेंगे और क्षत्रिय, वैश्य आदि चाण्डाल के कर्म अपनाएँगे, इसमें संशय नहीं है।॥17-18॥
 
Brahmins, Kshatriyas and Vaishyas will become hybrids by producing offspring among themselves. They will all become like Shudras, devoid of austerity and truth. The untouchables (Chandalas etc.) will perform the duties of Kshatriyas, Vaishyas etc. and Kshatriyas, Vaishyas etc. will adopt the duties of Chandalas, there is no doubt in this.॥17-18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas