श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.187.35 
नाभिशङ्‍‍क्यमिदं चापि वचनं मे त्वया विभो।
एवं करिष्य इति तं स मत्स्यं प्रत्यभाषत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मेरी बात पर आप संदेह न करें।’ तब राजा ने मछली से कहा - ‘बहुत अच्छा! मैं भी ऐसा ही करूँगा।’ ॥35॥
 
Lord! Please do not doubt what I am saying.' Then the king said to the fish - 'Very well! I will do the same.' ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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