|
| |
| |
श्लोक 3.187.35  |
नाभिशङ्क्यमिदं चापि वचनं मे त्वया विभो।
एवं करिष्य इति तं स मत्स्यं प्रत्यभाषत॥ ३५॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे प्रभु! मेरी बात पर आप संदेह न करें।’ तब राजा ने मछली से कहा - ‘बहुत अच्छा! मैं भी ऐसा ही करूँगा।’ ॥35॥ |
| |
| Lord! Please do not doubt what I am saying.' Then the king said to the fish - 'Very well! I will do the same.' ॥ 35॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|