श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.187.32 
बीजानि चैव सर्वाणि यथोक्तानि द्विजै: पुरा।
तस्यामारोहयेर्नावि सुसंगुप्तानि भागश:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों ने पूर्व में जितने प्रकार के बीजों का वर्णन किया है, उन सब को अलग-अलग एकत्रित करके उस नाव में सुरक्षित रख लो। 32.
 
Collect all the types of seeds that the brahmins have described in the past, separately, and keep them safely in that boat. 32.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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