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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 187: वैवस्वत मनुका चरित्र तथा मत्स्यावतारकी कथा
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श्लोक 26
श्लोक
3.187.26
यदा समुद्रे प्रक्षिप्त: स मत्स्यो मनुना तदा।
तत एनमिदं वाक्यं स्मयमान इवाब्रवीत्॥ २६॥
अनुवाद
जब मनु ने मछली को समुद्र में फेंका, तब वह मुस्कुराकर उनसे बोली-॥26॥
When Manu threw the fish into the ocean, it said to him smilingly -॥26॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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