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mahabharat 3.186.7: उनके तट पर पूजनीय और पुण्यात्मा पुरुष नाना प्रकार की अप्सराओं के साथ आनन्दपूर्वक निवास करते हैं। वे अप्सराएँ अत्यंत निर्मल सुगन्ध से सुगन्धित, नाना प्रकार के आभूषणों से विभूषित और सुवर्ण के समान चमकती हैं। 7॥   |   mahabharat अध्याय 3.186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.186.7 
तासां तीरेष्वासते पुण्यभाजो
महीयमाना: पृथगप्सरोभि:।
सुपुण्यगन्धाभिरलंकृताभि-
र्हिरण्यवर्णाभिरतीव हृष्टा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उनके तट पर पूजनीय और पुण्यात्मा पुरुष नाना प्रकार की अप्सराओं के साथ आनन्दपूर्वक निवास करते हैं। वे अप्सराएँ अत्यंत निर्मल सुगन्ध से सुगन्धित, नाना प्रकार के आभूषणों से विभूषित और सुवर्ण के समान चमकती हैं। 7॥
 
On their banks, revered and virtuous men reside in bliss with different Apsaras. Those Apsaras are fragrant with very pure fragrance, adorned with various ornaments and shine like gold. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)