Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.186.11: जो मनुष्य अंत समय में कांसे के थन, वस्त्र और दक्षिणा सहित कपिला गौ का दान करता है, उसके द्वारा दान की गई गौ उन गुणों से युक्त होकर कामधेनु बन जाती है और परलोक में दाता के पास पहुँचती है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 186: तार्क्ष्यमुनि और सरस्वतीका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.186.11 
ददाति यो वै कपिलां सचैलां
कांस्योपदोहां द्रविणैरुत्तरीयै:।
तैस्तैर्गुणै: कामदुहाथ भूत्वा
नरं प्रदातारमुपैति सा गौ:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अंत समय में कांसे के थन, वस्त्र और दक्षिणा सहित कपिला गौ का दान करता है, उसके द्वारा दान की गई गौ उन गुणों से युक्त होकर कामधेनु बन जाती है और परलोक में दाता के पास पहुँचती है ॥11॥
 
One who donates a Kapila cow along with a bronze udder, clothes and dakshina (offerings) during the last days, the cow donated by him becomes Kamadhenu with those qualities and reaches the donor in the next world. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)