Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.184.23: भरतश्रेष्ठ! यह सुनकर उन हैहयवंशी क्षत्रियों ने ‘एवमस्तु’ कहकर महामुनि अरिष्टनेमि का आदर और पूजन किया और प्रसन्नतापूर्वक अपने स्थान को चले गये। | mahabharat अध्याय 3.184: तपस्वी तथा स्वधर्मपरायण ब्राह्मणोंका माहात्म्य । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवमस्त्विति ते सर्वे प्रतिपूज्य महामुनिम्।
स्वदेशमगमन् हृष्टा राजानो भरतर्षभ॥ २३॥
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! यह सुनकर उन हैहयवंशी क्षत्रियों ने ‘एवमस्तु’ कहकर महामुनि अरिष्टनेमि का आदर और पूजन किया और प्रसन्नतापूर्वक अपने स्थान को चले गये।
Bharatshrestha! Hearing this, those Haihayavanshi Kshatriyas respected and worshiped the great sage Arishtanemi by saying 'Evamastu' and went to their place happy.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि मार्कण्डेयसमास्यापर्वणि ब्राह्मणमाहात्म्यकथने चतुरशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत मार्कण्डेयसमास्यापर्वमें ब्राह्मणमाहात्म्यवर्णनविषयक
एक सौ चौरासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८४॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २४ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥