Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.6-7: ब्राह्मण अभी ये बातें कह ही रहा था कि रथियों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर आते हुए दिखाई दिए। जैसे इंद्र शची के साथ आए थे, वैसे ही देवकीनन्दन श्रीहरि सत्यभामा के साथ कुरुवंश के रत्न पाण्डवों से मिलने के लिए वहाँ आए थे। | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण अभी ये बातें कह ही रहा था कि रथियों में श्रेष्ठ भगवान श्रीकृष्ण शैब्य और सुग्रीव नामक घोड़ों से जुते हुए रथ पर सवार होकर आते हुए दिखाई दिए। जैसे इंद्र शची के साथ आए थे, वैसे ही देवकीनन्दन श्रीहरि सत्यभामा के साथ कुरुवंश के रत्न पाण्डवों से मिलने के लिए वहाँ आए थे।
While the Brahmin was still speaking these things, the best of charioteers, Lord Krishna, was seen arriving in a chariot drawn by horses named Shaibya and Sugreeva. Just as Indra had come with Shachi, in the same way, Devakinandan Sri Hari had come there with Satyabhama to meet the Pandavas, the jewels of the Kuru clan. 6-7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥