Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.59: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब जीव शरीर त्यागकर परलोक में जाता है, तब उसके शुभ-अशुभ कर्म उसे किस प्रकार प्राप्त होते हैं तथा जीव इस लोक और परलोक में उन कर्मों के फल को किस प्रकार भोगता है?॥ 59॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देही च देहं संत्यज्य मृग्यमाण: शुभाशुभै:।
कथं संयुज्यते प्रेत्य इह वा द्विजसत्तम॥ ५९॥
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब जीव शरीर त्यागकर परलोक में जाता है, तब उसके शुभ-अशुभ कर्म उसे किस प्रकार प्राप्त होते हैं तथा जीव इस लोक और परलोक में उन कर्मों के फल को किस प्रकार भोगता है?॥ 59॥
O best of Brahmins! When a living being leaves his body and goes to the other world, how do his good and bad deeds reach him and how does the living being come into contact with the results of those deeds in this world and the other world?॥ 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥