Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.55: 'हमारी बहुत दिनों से इच्छा थी कि हमें आपकी सेवा और सत्संग का अवसर मिले। ये देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण भी हमसे मिलने यहाँ आये हैं।॥ 55॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सेव्यश्चोपासतिव्यश्च मतो न: काङ्क्षितश्चिरम्।
अयं च देवकीपुत्र: प्राप्तोऽस्मानवलोकक:॥ ५५॥
अनुवाद
'हमारी बहुत दिनों से इच्छा थी कि हमें आपकी सेवा और सत्संग का अवसर मिले। ये देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण भी हमसे मिलने यहाँ आये हैं।॥ 55॥
‘We had a long-standing desire to get this opportunity to serve you and have satsang. This Devakinandan Lord Krishna has also come here to meet us.॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥