सेव्यश्चोपासतिव्यश्च मतो न: काङ्क्षितश्चिरम्।
अयं च देवकीपुत्र: प्राप्तोऽस्मानवलोकक:॥ ५५॥
अनुवाद
'हमारी बहुत दिनों से इच्छा थी कि हमें आपकी सेवा और सत्संग का अवसर मिले। ये देवकीनन्दन भगवान श्रीकृष्ण भी हमसे मिलने यहाँ आये हैं।॥ 55॥
‘We had a long-standing desire to get this opportunity to serve you and have satsang. This Devakinandan Lord Krishna has also come here to meet us.॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥