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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन
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श्लोक 54
श्लोक
3.183.54
भवान् दैवतदैत्यानामृषीणां च महात्मनाम्।
राजर्षीणां च सर्वेषां चरितज्ञ: पुरातन:॥ ५४॥
अनुवाद
महामुनि! आप देवता, दानव, ऋषि, मुनि और समस्त राजाओं के चरित्र को जानने वाले प्राचीन ॥54॥
Mahamuni! You are an ancient sage who knows the characters of the gods, demons, sages, saints and all the kings. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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