Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.183.53: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! महामुनि मार्कण्डेयजी को बोलने के लिये तैयार देखकर कुरु राजा पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें कथा इस प्रकार प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी- 53॥ | mahabharat अध्याय 3.183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! महामुनि मार्कण्डेयजी को बोलने के लिये तैयार देखकर कुरु राजा पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने उन्हें कथा इस प्रकार प्रारम्भ करने की प्रेरणा दी- 53॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Seeing Mahamuni Markandeyaji ready to speak, Kuru king Pandu's son Yudhishthir inspired him to start the story in this way - 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥