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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 183: काम्यकवनमें पाण्डवोंके पास भगवान् श्रीकृष्ण, मुनिवर मार्कण्डेय तथा नारदजीका आगमन एवं युधिष्ठिरके पूछनेपर मार्कण्डेयजीके द्वारा कर्मफल-भोगका विवेचन
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श्लोक 11
श्लोक
3.183.11
तथैव सत्यभामापि द्रौपदीं परिषस्वजे।
पाण्डवानां प्रियां भार्यां कृष्णस्य महिषी प्रिया॥ ११॥
अनुवाद
इसी प्रकार श्रीकृष्ण की प्रिय रानी सत्यभामा ने भी पाण्डवों की प्रिय पत्नी पांचाली को आलिंगन किया था ॥11॥
Similarly, Satyabhama, the beloved queen of Krishna, also embraced Panchali, the beloved wife of the Pandavas. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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