श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 182: वर्षा और शरद्-ऋतुका वर्णन एवं युधिष्ठिर आदिका पुन: द्वैतवनसे काम्यकवनमें प्रवेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.182.2 
छादयन्तो महाघोषा: खं दिशश्च बलाहका:।
प्रववर्षुर्दिवारात्रमसिता: सततं तदा॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब काले बादल जोर-जोर से गर्जना करते हुए आकाश और सम्पूर्ण दिशाओं को ढकने लगे और दिन-रात निरन्तर वर्षा करने लगे॥ 2॥
 
Then, dark clouds, roaring loudly, covered the sky and all directions and began pouring rain continuously day and night.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)