vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना
»
श्लोक 32
श्लोक
3.18.32
कदापि सूतपुत्र त्वं जानीषे मां भयार्दितम्।
अपयातं रणं हित्वा यथा कापुरुषं तथा॥ ३२॥
अनुवाद
हे सारथिपुत्र! क्या तू यह समझता है कि मैं कायर हूँ, भयभीत हूँ और युद्ध से भाग गया हूँ?॥ 32॥
‘Son of a charioteer, do you think that I am a coward, overcome with fear, and have fled from the battle?॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×