Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.18.23: 'सारथिपुत्र! यदि कोई मेरा अथवा मेरे समान किसी भी व्यक्ति का अपशब्दों से उपहास करेगा, तो वह मृत्यु से भी अधिक दुःखदायी होगा; इसलिए अब तुम युद्ध से कभी भागना नहीं चाहिए॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 3.18: मूर्च्छावस्थामें सारथिके द्वारा रणभूमिसे बाहर लाये जानेपर प्रद्युम्नका अनुताप और इसके लिये सारथिको उपालम्भ देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धिग्वाचा परिहासोऽपि मम वा मद्विधस्य वा।
मृत्युनाभ्यधिक: सौते स त्वं मा व्यपया: पुन:॥ २३॥
अनुवाद
'सारथिपुत्र! यदि कोई मेरा अथवा मेरे समान किसी भी व्यक्ति का अपशब्दों से उपहास करेगा, तो वह मृत्यु से भी अधिक दुःखदायी होगा; इसलिए अब तुम युद्ध से कभी भागना नहीं चाहिए॥ 23॥
'Son of a charioteer! If someone makes fun of me or any person like me with abusive words, it will be more painful than death; therefore, you should never run away from the battle again.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥