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mahabharat 3.178.14-15: उसमें सैकड़ों मदमस्त हाथियों का बल था । वह एक साथ सैकड़ों मनुष्यों की गति रोक सकता था । उसका पराक्रम सिंह और सिंह के समान था । महाबली भीम उस वन में वृक्षों को उखाड़कर बड़े वेग से तोड़ डालते थे । वह अपनी गर्जना से उस वनभूमि के प्रदेशों और सम्पूर्ण वन को गुंजायमान कर देता था ॥14-15॥   |   mahabharat अध्याय 3.178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 178: महाबली भीमसेनका हिंसक पशुओंको मारना और अजगरद्वारा पकड़ा जाना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  3.178.14-15 
स मातङ्गशतप्राणो मनुष्यशतवारण:।
सिंहशार्दूलविक्रान्तो वने तस्मिन् महाबल:॥ १४॥
वृक्षानुत्पाटयामास तरसा वै बभञ्ज च।
पृथिव्याश्च प्रदेशान् वै नादयंस्तु वनानि च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उसमें सैकड़ों मदमस्त हाथियों का बल था । वह एक साथ सैकड़ों मनुष्यों की गति रोक सकता था । उसका पराक्रम सिंह और सिंह के समान था । महाबली भीम उस वन में वृक्षों को उखाड़कर बड़े वेग से तोड़ डालते थे । वह अपनी गर्जना से उस वनभूमि के प्रदेशों और सम्पूर्ण वन को गुंजायमान कर देता था ॥14-15॥
 
He had the strength of hundreds of mad elephants. He could stop the speed of hundreds of men at a time. His might was like that of a lion and a lion. The mighty Bhima used to uproot trees in that forest and break them again with great force. He used to make the regions of that forest land and the entire forest reverberate with his roar.॥14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)