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mahabharat 3.177.14: राजा सुबाहु से मिलने के बाद उन्होंने विशोक जैसे उनके सारथि, इन्द्रसेन जैसे उनके सेवकों, अग्र सेवकों और रसोइयों से भी मुलाकात की।   |   mahabharat अध्याय 3.177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 177: पाण्डवोंका गन्धमादनसे बदरिकाश्रम, सुबाहुनगर और विशाखयूप वनमें होते हुए सरस्वती-तटवर्ती द्वैतवनमें प्रवेश  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.177.14 
समेत्य राज्ञा तु सुबाहुना ते
सूतैर्विशोकप्रमुखैैश्च सर्वे।
सहेन्द्रसेनै: परिचारिकैश्च
पौरोगवैर्ये च महानसस्था:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
राजा सुबाहु से मिलने के बाद उन्होंने विशोक जैसे उनके सारथि, इन्द्रसेन जैसे उनके सेवकों, अग्र सेवकों और रसोइयों से भी मुलाकात की।
 
After meeting King Subahu, he also met his charioteers like Vishoka, his attendants like Indrasena, the front servants and the cooks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)