श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.175.25 
तेषु सर्वेषु कौरव्य प्रतियातेषु पाण्डवा:।
तस्मिन्नेव वने हृष्टास्त ऊषु: सह कृष्णया॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उन सबके चले जाने के बाद द्रौपदी सहित सभी पाण्डव उसी वन में सुखपूर्वक रहने लगे।
 
After all of them left, all the Pandavas along with Draupadi started living happily in the same forest. 25.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि निवातकवचयुद्धपर्वणि अस्त्रदर्शने पञ्चसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत निवातकवचयुद्धपर्वमें अस्त्रदर्शनविषयक एक सौ पचहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७५॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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