Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.175.24: वैशम्पायनजी कहते हैं - नरश्रेष्ठ! इस प्रकार अर्जुन को दिव्यास्त्रों का प्रदर्शन करने से रोककर समस्त देवता तथा अन्य सभी प्राणी जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से लौट गये। | mahabharat अध्याय 3.175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
निवार्याथ तत: पार्थं सर्वे देवा यथागतम्।
जग्मुरन्ये च ये तत्र समाजग्मुर्नरर्षभ॥ २४॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - नरश्रेष्ठ! इस प्रकार अर्जुन को दिव्यास्त्रों का प्रदर्शन करने से रोककर समस्त देवता तथा अन्य सभी प्राणी जिस मार्ग से आये थे, उसी मार्ग से लौट गये।
Vaishampayanji says – Narashrestha! Thus stopping Arjuna from displaying his divine weapons, all the gods and all other living beings returned back the way they had come.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥