श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.175.21 
एतानि रक्ष्यमाणानि धनंजय यथागमम्।
बलवन्ति सुखार्हाणि भविष्यन्ति न संशय:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'धनंजय! इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये अस्त्र शास्त्रविधि से सुरक्षित रखे जाने पर ही शक्तिशाली और सुखदायक होते हैं ॥ 21॥
 
'Dhananjaya! There is no doubt that these weapons are powerful and soothing only when kept safely in accordance with the scriptures. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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