श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 175: नारद आदिका अर्जुनको दिव्यास्त्रोंके प्रदर्शनसे रोकना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.175.18-19 
तस्मिंश्च तादृशे काले नारदश्चोदित: सुरै:।
आगम्याह वच: पार्थं श्रवणीयमिदं नृप॥ १८॥
अर्जुनार्जुन मा युङ्क्ष्व दिव्यान्यस्त्राणि भारत।
नैतानि निरधिष्ठाने प्रयुज्यन्ते कथंचन॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नराधिप! उस समय देवताओं की आज्ञा से देवर्षि नारद अर्जुन के पास आये और उनसे यह सुनने योग्य बात कहने लगे - 'अर्जुन! अर्जुन! इस समय दिव्यास्त्रों का प्रयोग मत करो। भारत! ये दिव्यास्त्र बिना लक्ष्य किये कभी नहीं चलाये जाते।' 18-19॥
 
Naradhip! At that time, at the behest of the Gods, Devarshi Narad came to Arjun and started telling him this worth listening to – 'Arjun! Arjun! Do not use divine weapons at this time. India These divine weapons are never fired without any target. 18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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