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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 174: अर्जुनके मुखसे यात्राका वृत्तान्त सुनकर युधिष्ठिरद्वारा उनका अभिनन्दन और दिव्यास्त्रदर्शनकी इच्छा प्रकट करना
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श्लोक 6
श्लोक
3.174.6
ततो दिव्यानि वस्त्राणि दिव्यान्याभरणानि च।
प्रादाच्छक्रो ममैतानि रुचिराणि बृहन्ति च॥ ६॥
अनुवाद
तत्पश्चात् देवताओं के राजा ने मुझे ये सुन्दर एवं विशाल दिव्य वस्त्र तथा दिव्य आभूषण प्रदान किये ॥6॥
Thereafter the King of the Gods gave me these beautiful and huge divine clothes and divine ornaments. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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