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श्लोक  3.171.6 
धाराणां च निपातेन वायोर्विस्फूर्जितेन च।
गर्जितेन च दैत्यानां न प्राज्ञायत किंचन॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वर्षा की मूसलाधार वर्षा, हवा के झोंके और राक्षसों की गर्जना से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। 6.
 
The torrents of rain, the gusts of wind and the roars of the demons made nothing visible. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)