श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 171: दानवोंके मायामय युद्धका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.171.1 
अर्जुन उवाच
ततोऽश्मवर्षं सुमहत् प्रादुरासीत् समन्तत:।
नगमात्रै: शिलाखण्डैस्तन्मां दृढमपीडयत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - महाराज ! तत्पश्चात सब ओर से पत्थरों की भारी वर्षा होने लगी। युद्धभूमि में वृक्षों के समान ऊँचे पत्थर गिरने लगे, इससे मुझे बड़ी पीड़ा हुई॥1॥
 
Arjun said - Maharaj! Thereafter a heavy rain of stones started from all sides. Boulders as tall as trees started falling on the battlefield, this caused me great pain.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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