श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.168.26 
ततोऽहमब्रुवं नाहं दिव्यान्यस्त्राणि शत्रुहन्।
मानुषेषु प्रयोक्ष्यामि विनास्त्रप्रतिघातनात्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर मैंने कहा - 'हे शत्रुओं के स्वामी! मैं शत्रुओं के द्वारा चलाए गए अस्त्रों को दूर करने के अतिरिक्त मनुष्यों पर दिव्यास्त्रों का प्रयोग नहीं करूंगा॥ 26॥
 
On hearing this I replied, 'O lord of enemies! I will not use divine weapons on humans except to ward off the weapons used by the enemies.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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