श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.168.24 
ततोऽहमब्रुवं शक्रं प्रसीद भगवन् मम।
आचार्यं वरयेयं त्वामस्त्रार्थं त्रिदशेश्वर॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने देवराज इन्द्र से कहा - 'प्रभो! आप मुझ पर प्रसन्न हों। देवेश्वर! मैं आपको अस्त्र-शस्त्र विद्या प्राप्त करने के लिए अपना गुरु बनाता हूँ।' 24॥
 
Then I said to Devraj Indra – ‘Lord! You be happy with me. Deveshwar! I make you my teacher to acquire the knowledge of weapons. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)