श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  3.168.23-24h 
मातलिर्मन्नियोगात् त्वां त्रिदिवं प्रापयिष्यति।
विदितस्त्वं हि देवानां मुनीनां च महात्मनाम्॥ २३॥
इहस्थ: पाण्डवश्रेष्ठ तप: कुर्वन् सुदुष्करम्।
 
 
अनुवाद
मेरी अनुमति से मातलि तुम्हें स्वर्ग भेजेंगे। हे पाण्डवश्रेष्ठ! यहाँ तुम जो अत्यन्त कठिन तपस्या कर रहे हो, उसके कारण देवताओं और महर्षियों में तुम्हारी कीर्ति बहुत बढ़ गई है।॥23 1/2॥
 
‘With my permission Matali will send you to heaven. O best of Pandavas! Due to the extremely difficult penance you are performing here, your fame has increased a lot among the gods and great sages.'॥ 23 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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