श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 168: अर्जुनद्वारा स्वर्गलोकमें अपनी अस्त्रशिक्षा और निवातकवच दानवोंके साथ युद्धकी तैयारीका कथन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.168.21 
त्वया हि तीर्थेषु पुरा समाप्लाव: कृतोऽसकृत्।
तपश्चेदं महत् तप्तं स्वर्गं गन्तासि पाण्डव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'हे पाण्डुपुत्र! तुमने पहले भी अनेक बार अनेक तीर्थों में स्नान किया है और इस समय भी तुमने यह महान तप किया है, अतः तुम भौतिक शरीर से स्वर्ग जाने के योग्य हो गये हो।
 
'O son of Pandu! You have bathed in many holy places many times before and at this time you have also performed this great penance, therefore you have become eligible to go to heaven in your physical body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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