Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.167.46-48h: तत्पश्चात् भगवान शिव ने मेरा धनुष तथा अक्षय बाणों से भरे हुए दोनों तरकश लेकर मुझे दे दिए और कहा- 'परंतप! अपने ये अस्त्र-शस्त्र ले लो।' 'कुंतीपुत्र! मैं तुमसे संतुष्ट हूँ। बताओ, मैं तुम्हारा कौन-सा कार्य सम्पन्न करूँ? वीर! तुम्हारे मन में जो भी इच्छा हो, मुझे बताओ। मैं उसे पूर्ण करूँगा। अमरता के अतिरिक्त तुम्हारी जो भी इच्छा हो, वह मुझे बताओ।' | mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्तद् धनुरादाय तूणौ चाक्षय्यसायकौ।
प्रादान्ममैव भगवान् धारयस्वेति चाब्रवीत्॥ ४६॥
तुष्टोऽस्मि तव कौन्तेय ब्रूहि किं करवाणि ते।
यत् ते मनोगतं वीर तद् ब्रूहि वितराम्यहम्॥ ४७॥
अमरत्वमपाहाय ब्रूहि यत् ते मनोगतम्।
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान शिव ने मेरा धनुष तथा अक्षय बाणों से भरे हुए दोनों तरकश लेकर मुझे दे दिए और कहा- 'परंतप! अपने ये अस्त्र-शस्त्र ले लो।' 'कुंतीपुत्र! मैं तुमसे संतुष्ट हूँ। बताओ, मैं तुम्हारा कौन-सा कार्य सम्पन्न करूँ? वीर! तुम्हारे मन में जो भी इच्छा हो, मुझे बताओ। मैं उसे पूर्ण करूँगा। अमरता के अतिरिक्त तुम्हारी जो भी इच्छा हो, वह मुझे बताओ।'
Thereafter Lord Shiva took my bow and both the quivers filled with inexhaustible arrows and gave them to me and said- 'Parantapa! Take these weapons of yours.' Son of Kunti! I am satisfied with you. Tell me, which task of yours should I accomplish? Brave! Tell me whatever wish you have in your mind. I will fulfill it. Tell me whatever wish you have except immortality.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥