श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.167.4 
सम्यग् वा ते गृहीतानि कच्चिदस्त्राणि पाण्डव।
कच्चित् सुराधिप: प्रीतो रुद्रो वास्त्राण्यदात् तव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'पाण्डुनन्दन! क्या तुमने सभी अस्त्र-शस्त्र अच्छी तरह सीख लिए हैं? क्या इन्द्र या रुद्रदेव प्रसन्न होकर तुम्हें अस्त्र-शस्त्र प्रदान कर चुके हैं?'
 
'Pandunandan! Did you learn all the weapons well? Has Lord Indra or Lord Rudra been pleased and given you weapons? 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)