Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.167.36: तत्पश्चात् मेरे द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र के तेज से वहाँ उपस्थित समस्त लोग क्रोधित हो गए और क्षण भर में ही सम्पूर्ण दिशाएँ और आकाश सब ओर से ज्वालाओं से भर गए॥36॥ | mahabharat अध्याय 3.167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: संतापिता लोका मत्प्रसूतेन तेजसा।
क्षणेन हि दिश: खं च सर्वतो हि विदीपितम्॥ ३६॥
अनुवाद
तत्पश्चात् मेरे द्वारा छोड़े गए ब्रह्मास्त्र के तेज से वहाँ उपस्थित समस्त लोग क्रोधित हो गए और क्षण भर में ही सम्पूर्ण दिशाएँ और आकाश सब ओर से ज्वालाओं से भर गए॥36॥
Thereafter all the people present there became angry due to the brilliance of the Brahmastra that I had unleashed. In a single moment all directions and the sky became engulfed in flames from all sides.॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥