श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.167.27 
तस्य तच्छतधा रूपमभवच्च सहस्रधा।
तानि चास्य शरीराणि शरैरहमताडयम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस समय उसके सैकड़ों-हजारों रूप प्रकट हुए और मैंने बाणों से उसके सब शरीरों पर गहरी चोट पहुँचाई॥27॥
 
At that time hundreds and thousands of his forms appeared and I inflicted deep wounds on all his bodies with arrows.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)