श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.167.19 
निघ्नन् प्रोथेन पृथिवीं विलिखंश्चरणैरपि।
सम्मार्जञ्जठरेणोर्वीं विवर्तंश्च मुहुर्मुहु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह थूथन से भूमि पर प्रहार करता और पैरों से भूमि खोदता। वह बार-बार लेटता और पेट से भूमि को इस प्रकार साफ करता मानो उसे झाड़ू से साफ किया गया हो॥19॥
 
He would strike the ground with his snout and dig it with his feet. He would lie down again and again and clean the ground with his stomach as if it had been swept.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)