vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा
»
श्लोक 15
श्लोक
3.167.15
ततोऽहं वचनात् तस्य गिरिमारुह्य शैशिरम्।
तपोऽतप्यं महाराज मासं मूलफलाशन:॥ १५॥
अनुवाद
हे महाराज! उनकी आज्ञा मानकर मैं हिमालय पर चढ़ गया और तपस्या में लग गया तथा एक महीने तक केवल फल-फूल खाकर रहा॥ 15॥
O Maharaj! Following his orders, I climbed the Himalayas and engaged in tapasya and lived for a month eating only fruits and flowers.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×