श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 167: अर्जुनके द्वारा अपनी तपस्या-यात्राके वृत्तान्तका वर्णन, भगवान् शिवके साथ संग्राम और पाशुपतास्त्र-प्राप्तिकी कथा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.167.12 
स मामपृच्छत् कौन्तेय क्वासि गन्ता ब्रवीहि मे।
तस्मा अवितथं सर्वमब्रुवं कुरुनन्दन॥ १२॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने मुझसे कहा, ‘कुन्तीनन्दन, आप कहाँ जा रहे हैं? मुझे ठीक-ठीक बताइए।’ तब मैंने उनसे सब कुछ सच-सच कह दिया॥12॥
 
He said to me, 'Kuntinandan, where are you going? Tell me exactly.' Then I told him everything truthfully.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)