श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.163.9 
एतत् संयमनं पुण्यमतीवाद्‍भुतदर्शनम्।
प्रेतराजस्य भवनमृद्धॺा परमया युतम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'यह प्रेतराज का धाम अत्यंत समृद्ध, अत्यंत पवित्र और देखने में अद्भुत है। हे राजन! इसका नाम संयमन (या संयमनीपुरी) है।॥9॥
 
'This abode of the Pretraj is extremely prosperous, extremely sacred and wonderful to look at. O King! Its name is Sanyaman (or Sanyamanipuri).॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)