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श्लोक 3.163.4  |
असौ सागरपर्यन्तां भूमिमावृत्य तिष्ठति।
शैलराजो महाराज मन्दरोऽति विराजते॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| 'महाराज! समुद्र पर्यन्त भूमि को घेरे हुए खड़ा हुआ महान् मंदराचल पर्वत चमक रहा है ॥4॥ |
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| 'Maharaj! The great mountain Mandaraachal, which stands encircling the land up to the sea, is shining. ॥ 4॥ |
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