श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.163.32 
स मासान् विभजन् काले बहुधा पर्वसंधिषु।
तथैव भगवान् सोमो नक्षत्रै: सह गच्छति॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'इसी प्रकार भगवान् चन्द्रमा भी नक्षत्रों के साथ मेरु पर्वत की परिक्रमा करते हैं और पर्व संधि के समय महीनों को भिन्न-भिन्न काल में विभाजित करते रहते हैं ॥ 32॥
 
'In the same way, Lord Moon also revolves around Mount Meru along with the stars and keeps dividing the months into different periods at the time of the festival junction. ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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