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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.163.29 
एतं ज्योतींषि सर्वाणि प्रकर्षन् भगवानपि।
कुरुते वितमस्कर्मा आदित्योऽभिप्रदक्षिणम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'सूर्यदेव, जिनका मुख्य कार्य अंधकार को दूर करना है, वे भी समस्त ज्योतियों को अपनी ओर खींचते हुए इस मेरु पर्वत की परिक्रमा करते हैं॥ 29॥
 
'The Sun God, whose main duty is to remove darkness, also circumambulates this Mount Meru while pulling all the lights towards himself.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)