श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.163.2 
तेऽभिवाद्यार्ष्टिषेणस्य पादौ धौम्यस्य चैव ह।
तत: प्राञ्जलय: सर्वे ब्राह्मणांस्तानपूजयन्॥ २॥
 
 
अनुवाद
तब सभी पाण्डवों ने अरिष्टीसेन और धौम्य के चरणों में प्रणाम किया और हाथ जोड़कर सभी ब्राह्मणों की पूजा की।
 
Then all the Pandavas bowed to the feet of Arishtisena and Dhoumya and with folded hands worshipped all the Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)