श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.163.16 
देशं विरजसं पश्य मेरो: शिखरमुत्तमम्।
यत्रात्मतृप्तैरध्यास्ते देवै: सह पितामह:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'युधिष्ठिर! उस उत्तम मेरुका शिखर को देखो, जो रजोगुण से रहित क्षेत्र है। वहाँ पितामह ब्रह्माजी अपने में तृप्त देवताओं के साथ निवास करते हैं।॥16॥
 
'Yudhishthira! Look at that excellent peak of Meruka, which is a region devoid of the element of passion. There the grandfather Brahma resides with the gods who are content in themselves.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)