श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.163.15 
अत्रैव प्रतितिष्ठन्ति पुनरेवोदयन्ति च।
सप्त देवर्षयस्तात वसिष्ठप्रमुखा: सदा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'तात्! वशिष्ठ आदि सात देवर्षि इन्हीं प्रजापति में लीन हो जाते हैं और उनसे पुनः प्रकट हो जाते हैं। 15॥
 
‘Tat! The seven devarshis like Vashishtha get absorbed in this Prajapati and reappear from him. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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