श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.163.13 
यस्मिन् ब्रह्मसदश्चैव भूतात्मा चावतिष्ठते।
प्रजापति: सृजन् सर्वं यत् किञ्चिज्जङ्गमागमम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'यहीं पर ब्रह्माजी की सभा होती है, जहाँ समस्त प्राणियों के आत्मा ब्रह्मा प्रतिदिन निवास करते हैं और स्थावर-जंगम समस्त प्राणियों की रचना करते हैं। 13॥
 
'It is here that Brahmaji's assembly is held, where Brahma, the soul of all living beings, resides daily, creating all living beings, movable and immovable. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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