श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 163: धौम्यका युधिष्ठिरको मेरु पर्वत तथा उसके शिखरोंपर स्थित ब्रह्मा, विष्णु आदिके स्थानोंका लक्ष्य कराना और सूर्य-चन्द्रमाकी गति एवं प्रभावका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.163.1 
वैशम्पायन उवाच
तत: सूर्योदये धौम्य: कृत्वाऽऽह्निकमरिंदम।
आर्ष्टिषेणेन सहित: पाण्डवानभ्यवर्तत॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - शत्रुदमन राजा! तत्पश्चात जब सूर्य उदय हुआ, तब अष्टीषेण के साथ धौम्यजी अपना नित्यकर्म पूरा करके पाण्डवों के पास आये॥1॥
 
Vaishampayanji says – Shatrudaman King! After that, when the sun rose, Dhaumyaji along with Ashtishen completed his daily routine and came to the Pandavas. 1॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas