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mahabharat 3.162.7: जो मनुष्य कर्मों के विभाग को नहीं जानता, समय को नहीं पहचानता और कर्मों की विशेषता को नहीं समझता, वह मिथ्या बुद्धि वाला मनुष्य इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी अवश्य ही नष्ट हो जाता है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.162.7 
कर्मणामविभागज्ञ: प्रेत्य चेह विनश्यति।
अकालज्ञ: सुदुर्मेधा: कार्याणामविशेषवित्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य कर्मों के विभाग को नहीं जानता, समय को नहीं पहचानता और कर्मों की विशेषता को नहीं समझता, वह मिथ्या बुद्धि वाला मनुष्य इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी अवश्य ही नष्ट हो जाता है ॥7॥
 
A person who does not know the division of actions, does not recognize the time and does not understand the specialty of actions, that person with a wrong intellect is sure to perish in this world as well as the next. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)