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mahabharat 3.162.19: हे प्रिये! संसार में जो भी दिव्य गुण महान माने जाते हैं, वे सब अर्जुन में जन्म से ही विद्यमान हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.162.19 
या: काश्चन मता लोके स्वर्ग्या: परमसम्पद:।
जन्मप्रभृति ता: सर्वा: स्थितास्तात धनंजये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिये! संसार में जो भी दिव्य गुण महान माने जाते हैं, वे सब अर्जुन में जन्म से ही विद्यमान हैं॥19॥
 
O dear! All the heavenly virtues that are considered to be great in the world are present in Arjuna right from his birth.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)