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mahabharat 3.162.1: कुबेर बोले - युधिष्ठिर! धैर्य, कौशल, स्थान, काल और पराक्रम - ये पाँच सांसारिक कार्यों की सफलता के लिए हैं॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 162: कुबेरका युधिष्ठिर आदिको उपदेश और सान्त्वना देकर अपने भवनको प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.162.1 
धनद उवाच
युधिष्ठिर धृतिर्दाक्ष्यं देशकालपराक्रमा:।
लोकतन्त्रविधानानामेष पञ्चविधो विधि:॥ १॥
 
 
अनुवाद
कुबेर बोले - युधिष्ठिर! धैर्य, कौशल, स्थान, काल और पराक्रम - ये पाँच सांसारिक कार्यों की सफलता के लिए हैं॥ 1॥
 
Kubera said - Yudhishthira! Patience, skill, place, time and valour - these five are for the success of worldly tasks.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)