श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 161: कुबेरका गन्धमादन पर्वतपर आगमन और युधिष्ठिरसे उनकी भेंट  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  3.161.18-19h 
प्रमृद्य तरसा शैलं मानुषेण धनेश्वर॥ १८॥
एकेन सहिता: सङ्खॺे रणे क्रोधवशा गणा:।
 
 
अनुवाद
'धनेश्वर! एक पुरुष ने इस पर्वत को बलपूर्वक रौंद डाला है और युद्ध में क्रोधव नामक राक्षसों को मार डाला है॥18 1/2॥
 
'Dhaneshwar! A man has trampled this mountain with force and in the battle he has killed the demons named Krodhavas.॥ 18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)