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mahabharat 3.16.33: वीर पाण्डुनन्दन! जब प्रद्युम्न ने हर्ष में भरकर ऐसा कहा, तब सारी सेना स्थिर हो गई और उसी हर्ष और उत्साह के साथ युद्ध करने लगी॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 16: शाल्वकी विशाल सेनाके आक्रमणका यादवसेनाद्वारा प्रतिरोध, साम्बद्वारा क्षेमवृद्धिकी पराजय, वेगवान‍्का वध तथा चारुदेष्णद्वारा विविन्ध्य दैत्यका वध एवं प्रद्युम्नद्वारा सेनाको आश्वासन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.16.33 
एवं ब्रुवति संहृष्टे प्रद्युम्ने पाण्डुनन्दन।
विष्ठितं तद् बलं वीर युयुधे च यथासुखम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वीर पाण्डुनन्दन! जब प्रद्युम्न ने हर्ष में भरकर ऐसा कहा, तब सारी सेना स्थिर हो गई और उसी हर्ष और उत्साह के साथ युद्ध करने लगी॥33॥
 
Brave Pandunandan! When Pradyumna, filled with joy, said this, the entire army became stable and started fighting with the same joy and enthusiasm. 33॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अर्जुनाभिगमनपर्वणि सौभवधोपाख्याने षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अर्जुनाभिगमनपर्वमें सौभवधोपाख्यानविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)